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मोदी सरकार के "पालने के पांव"

Posted On: 17 Jul, 2015 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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देश में दशकों बाद सत्ता परिवर्तन हुई। भा ज प की केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। इस सफलता का श्रेय एक मात्र नरेंद्र मोदी जी के प्रक्रम, सामर्थ एवं उनके पुरसार्थ को ही जाता है।लेकिन इस का अर्थ यह नहीं, की हम अपने प्रयासों को कम कर आंके। देश- समाज के लिए उनकी एक अपनी दृस्टि है। उन्हें अपने युवा देश का अभिमान है। इस तथ्य का उल्लेख, वे देश में ही नहीं, बल्कि विश्व में भी प्रायः करते रहते है, और ऐसा करते समय उनका सीना 56″ को भी पार करता दीखता है। उन्हें इस बात का आभास रहता है, की यदि देश की युवा शक्ति को उचित दिशा दी जाय, तो युवा शक्ति अपने पराक्रम से देश को विकास एवं समृद्ध की उस उँचाई तक पहुचने की छमता रखता है, जिस उँचाई को छूने की आज विश्व कल्पना भी नही कर सकता।
बाल्यकाल में सड़को पर चाय बेचने से प्रारम्भ उनकी जीवन यात्रा 15 सालों के गुजरात राज्य के मुख्यमन्त्रित्वा काल से होती हुई आज देश के प्रधान मंत्री पद तक पहुंच गयी। इस समय – काल में उंन्होने देश के सभी वर्ग जैसे – किसान ,विद्यार्थी ,व्योसाई जैसे तमाम अन्य वर्गों की, तमाम व्योहारिक कठिनाइयों को मात्र जाना ही नहीं , अपितु महसूस भी किया । आज भारतीय राजनीत में शायद ही कोई ऐसी शक्शियत हो, जो उन के समकक्छ खड़े होने की सोच भी सके। ऐसे में विरोधी वर्ग जब – जब उन पर अपनी एक उंगली उठाते है, तो उनकी तीन – तीन उंगलियाँ, उनकी तरफ उठ जाती हैं, जिसे वे अपनी अज्ञानता वश सज्ञान में नहीं ले पाते है।
प्रधानमंत्री जी ने अपने “अभिमान “(युवा शक्ति ) की व्योहारिक कठिनाई की विवशता को महसूस किया। उंन्होने देखा की देश की शिक्छा प्रणाली, परिक्छा प्रणाली साथ ही सरकारी नौकरी भर्ती प्रणाली सारी की सारी व्योसायिक हो चली है। असमर्थ जन, धन बल से देश में सिक्छा एवं सरकारी नौकरियां खरीद रहे है, और समर्थ जन, धन के आभाव में निराशा के अंधकार में डूब जाते हैं। इन परिस्थितियों में देश समाज को भविष्य में इस की भरी कीमत चुकानी पड सकती है। वर्तमान शिक्छा व्यवस्था एवं सरकारी नौकरी व्यवस्था के जिम्मेदार देश और समाज की जड़ में दीमक की खेती करने में लगे है,जिसके दूरगामी परिणाम देश को सदियों तक एक त्रासदी के रूप में भोगना पड सकता है। “नीम हकीम ” की हम एक भारी फौज खड़ी कर रहे है, और दूसरी तरफ कुंठित होनहारों की फौज खड़ी होती जा रही है। भविष्य में परिस्थित जनित परिणामों की कल्पना सरलता से ही की जा सकती है।
आज सरकार का कौशल विकास कार्यक्रम इस दिशा में एक सक्छम वैकल्पिक प्रयास है, जो शिक्छा की जड़ता को ढकता हुआ, युवा वर्ग को नौकरी के लायक बनाने का एक गंभीर प्रयास है, साथ ही जोखम उठाने में सक्छम जन को कौशल प्रदान कर, अपना व्ययसाय प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित करने का मूल उद्देश्य है। किसानो,मजदूरों एवं निम्मन वर्ग के साथ ही सभी के लिए, पेंशन योजना, जीवना बीमा एवं दुर्घटना बीमा योजना,के रूप में 125 करोड़ जन को एक ऐसा आलम्बन दिया है, की सभी निर्भीक जीवन जी सकेंगे। शायद अब थ्रेशर में हात कट जाने पर अथवा ट्रेक्टर के पलट जाने में हुई टूट फुट अथवा मृत्यु के दशा में सरकारी सहायता के लिए दर -दर ठोकर नहीं खानी पड़ेगी। अब ऐसे में आवश्यकता है, इस योजना की जानकारी के प्रति लोगो में जागरूकता बढ़ाने की, एवं शीघ्र से शीघ्र योजना से सभी को जोड़ने की। पूर्व में इस प्रकार की दृष्ट का आभास किसी भी सरकार ने शायद ही दिया हो।
इसी क्रम में सरकार की “जन धन ” योजना, एक ऐसी योजना है, जिसे हम निर्धन वर्ग की तिजोरी मान कर चलें। सारी सरकारी योजनाएं जनधन से सम्बद्ध होंगी। इस प्रकार सरकार की दृष्टि है, की प्रत्येक को अपने – अपने अधिकारों का स्वामी बना दिया जाए। यद्यपि अभी शरूआत ही है, किन्तु आशा की जाती है, की भविष्य में ये योजनांए निम्नन वर्ग की “रीड की हड्डी” साबित होंगी, और इंन्हे स्वालम्बी बना सकेंगी ।
स्पस्ट है- की नियत साफ है, प्रयास स्पस्ट रूप से जन कल्याण के है। आवश्यकता मात्र इतनी है, की जन – मानस अपने अधिकारों को समझें, और योजनाओ का पूरा – पूरा लाभ उठाएं। बस।

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